Saturday, October 14, 2017

पीला पड़ता हरा आदमी

आदमी 

सड़क पर है खड़ा आदमी 
खेत में है पड़ा आदमी 
इधर हुज़ूर की खिदमत में देखो
हर बात पर है अड़ा आदमी 

कलियाँ  क्यों हैं घबराई हुईं 
भौरें हैं क्यों बौखलाए  हुए 
बागीचे की दहलीज़ पर जो  
परछाईं  में दीखता खड़ा आदमी 

जिन्दा है पर मरा आदमी 
इंसान बनता पर डरा  आदमी 
काम खोजता काम बनाता 
पीला पड़ता हरा आदमी 

जन्म लिए तो बनो आदमी 
जीवन में कुछ तनो आदमी
क्या जीत गए क्या हार गए तुम  
मिटटी के संग में सनो  आदमी 

डॉ. नन्दितेश निलय  

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